Eletter 03 - औरतौं की दोहरी बोझ.

 

आज के दिन महिलाएं पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चल रही है, परंतु देखा जा रहा है कि महिलाओं पर नौकरी और घर का काम असंतुलित बनता जा रहा है. NSSO के अनुसार महिलाएं हर दिन औसतन 5.5 घंटे काम करती हैं और पुरुष केवल 30 मिनट. इससे महिलाओं में मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ रही है. यदि पुरुष भी घरेलू कार्य में सहभागी बने तो यह बोझ साझा होगा. बेटियों को पढ़ाने के साथ-साथ कामकाजी बहुओं को संतुलन दिलाना भी जरूरी है, तभी परिवार और देश दोनों आगे बढ़ सकेंगे.


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