Eletter 04 - विधवाओं की स्वतंत्रता
आज से करीबन 200 वर्ष पूर्व 1825 में राजा राम मोहन रॉय ने ब्रिटिश गवर्नर जनरल विलियम बेंटिक की मदद से सती प्रथा के खिलाफ मुहीम चलाया था. परंतु विडंबना यह है कि सती तो चला गया परंतु विधवाओं के प्रति बुरी नजर, दुराचार, आज भी कायम है उन्हें ना तो कुछ खाने-पीने या मनपसंद कपड़े पहनने की आजादी है ना ही हंसते बोलने की या कहीं बाहर जाने की और आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा शोषण करने वाली स्वयं महिलाएं ही हैं. रीति रिवाज को ढाल बनाकर विधवाओं के प्रति कुदृष्टि रखी जाती है और उनकी मुश्किल वक्त को और भी दुष्कर बनाया जाता है. सवाल यह है कि क्या हम सब जागरूक लोग दूसरे राजा राम मोहन रॉय के इंतजार में बैठे रहे या स्वयं मshal उठाकर विधवाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं.
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